नई दिल्ली. आम लोगों के बैंक डिपॉजिट्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार ने बजट 2020 में एक अहम प्रावधान किया। बजट प्रस्ताव के मुताबिक, अब बैंक में जमा राशि पर बीमा कवर पांच लाख रुपए होगा। पहले यह एक लाख रुपए था। कुछ महीने पहले मुंबई में पीएमसी सहकारी बैंक घोटाला सामने आया था। वहां हजारों जमाकर्ताओं का पैसा डूब गया था। इसके बाद बैंक डिपॉजिट्स के बीमा कवर को लेकर सरकार और रिजर्व बैंक की काफी आलोचना हुई थी। एक लाख रुपए का मौजूदा कवर 1993 में लागू किया गया था। यानी 27 साल बाद इस बीमा कवर की राशि पांच गुना की गई है।
फिलहाल क्या होता है?
अब तक किसी बैंक के दिवालिया या बंद होने पर जमाकर्ता को सिर्फ एक लाख रुपए का बीमा कवर मिलता था। मान लीजिए किसी खाताधारक के बैंक में 10 लाख रुपए जमा हैं। किसी वजह से बैंक बंद या दिवालिया होता है तो खाताधारक को सिर्फ 1 लाख रुपए मिलते थे। इसकी वजह यह थी कि ‘डिपॉजिट इन्श्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन’ (डीआईसीजीसी) ने जमा राशि पर बीमा कवर 1 लाख रुपए ही निर्धारित किया था। डीआईसीजीसी आरबीआई का सहायक उपक्रम है।
अब क्या होगा?
मान लीजिए किसी जमाकर्ता का बैंक में 10 लाख रुपए डिपॉजिट है। यह किसी भी रूप में हो सकता है। सेविंग, एफडी इत्यादि। अगर बैंक किन्ही वजहों से बंद होता है तो जमाकर्ता को पांच लाख रुपए बीमा कवर मिलेगा। यह पहले सिर्फ 1 लाख रुपए था। डीआईसीजीसी जमाकर्ता से इस बीमा पर कोई प्रीमियम सीधे तौर पर नहीं लेता। यह प्रीमियम बैंक ही भरते हैं। डिपॉजिट गारंटी सिर्फ बैंक बंद होने की स्थिति में लागू होती है। अगर बैंक काम कर रहा है तो इसका लाभ नहीं मिल सकता। अगर किसी जमाकर्ता के 4 लाख रुपए डिपॉजिट हैं तो नए प्रावधान के मुताबिक, उसे ये पूरी राशि बीमा कवर के रूप में वापस मिल सकेगी।
नियम सभी बैंकों के लिए
बैंक डिपॉजिट कवर इंश्योरेंस स्कीम देश के सभी बैंकों के लिए है। यानी इसके तहत प्राईवेट सेक्टर और कोऑपरेटिव बैंक भी आते हैं। इतना ही नहीं विदेशी बैंकों को भी अपने ग्राहकों को इस योजना का लाभ देना होता है। दूसरे देश और केंद्र-राज्य की सरकारें इस योजना का फायदा नहीं उठा सकतीं।