छत्तीसगढ़ में एक हजार करोड़ का घोटाला 
समाज कल्याण के बजाये अफसरों ने किस तरह से किया खुद का कल्याण
सुनिए मामले की अदालत में पैरवी कर रहे वकील देवर्षि ठाकुर की जुबानी
सीबीआई जांच रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अफसर
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे अफसरों की दलील है कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने के पहले हाईकोर्ट ने उन्हें कोई नोटिस तक जारी नहीं किया | तमाम अफसरों ने रिव्यू पिटीशन में अपने बचाव की दलीले दी है | उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि पिछली सरकार ने माना था कि इस मामले में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है | यही नहीं सुप्रीम कोर्ट के अलावा बिलासपुर हाईकोर्ट में भी रिव्यू पिटीशन दायर कर एक आरोपी अफसर और पूर्व ACS बी.एल अग्रवाल ने खुद को बेगुनाह बताया है |
उधर इस घोटाले को लेकर चल रही क़ानूनी कार्रवाई और दांवपेचों पर पूर्व महाधिवक्ता जुगल किशोर गिल्डा के भी मैदान में कूदने की खबर है | बताया जाता है कि मामले पर उनकी पैनी निगाहे है | दरअसल पूर्व महाधिवक्ता जी.के गिल्डा अफसरों की कार्यप्रणाली से काफी हद तक वाकिफ है | यह भी बताया जाता है कि उनकी मजबूत क़ानूनी पकड़ का फायदा तत्कालीन सरकार को प्राप्त हुआ था | लिहाजा मौजूदा कार्यकाल में वर्तमान महाधिवक्ता और उनके कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर तुलना और मंथन भी किया जा रहा है।