डेढ़ गुना बढ़ गए स्टोन के भाव, सूरत में होता है 99% इस्तेमाल
सूरत / चीन में कोरोना वायरस से हाहाकार मचा है। कोरोना का असर अब सूरत के कपड़ा उद्याेग पर भी दिखाई देने लगा है। वायरस की वजह से चीन से आने वाले सामानों पर ब्रेक लगने से कपड़ा कारोबारी परेशान हो गए हैं। सूरत में साड़ी और लंहगे में लगाए जाने वाले स्टोन चीन से ही आते हैं। साड़ी और लहंगे में एक एम एम से लेकर 10 एमएम के स्टोन का इस्तेमाल होता है।
भाव डेढ़ गुना बढ़े
पिछले करीब एक हफ्ते से स्टोन न आने के कारण इसके भाव डेढ़ गुना तक बढ़ गए हैं। सूरत के कपड़ा मार्केट में स्टोन वाली साड़ियां, लहंगे बहुत महंगे बिकते हैं। चीन के 99 फीसदी स्टोन का इस्तेमाल सूरत में होता है। ज्ञातव्य है कि बड़े व्यापारी जो समय पर पेमेंट चुका देते हैं उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है, जबकि देरी से पेमेंट देने वाले छोटे कारोबारियों की हालत खराब हो गई है। इन्हें आसानी से स्टोन नहीं मिल रहा है। चीन से जल्द स्टोन नहीं आया तो सूरत के कपड़ा बाजार की हालत और खराब हो जाएगी। वर्क कपड़े की कीमत भी बढ़ जाएगी।
चीन से प्रतिमाह 50 लाख से अधिक स्टोन आता है
फोस्टा अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने बताया कि चीन से हर महीने 50 लाख से अधिक स्टोन सूरत के कपड़ा मार्केट में आता है। कोरोना वायरस फैलने के कारण स्टोन पर ब्रेक लग गया है। माल की कमी के कारण विक्रेता ज्यादा पैसे वसूल रहे हैं। कपड़े की कोस्ट पर इसका असर पड़ेगा।
सूरत में 80 फीसदी कपड़ों पर लगता है स्टोन
कपड़ा व्यापारी विक्रम भूतड़ा ने बताया कि सूरत में बनने वाली हैवी साड़ियां, लहंगे, हैवी ब्लाउज और ड्रेस में 80 फीसदी स्टोन लगाए जाते हैं। बिना स्टोन लगाए कपड़े का लुक नहीं मिलता, बिक्री भी नहीं होती है। सूरत के कपड़ा मार्केट में स्टोन वाले कपड़ों की मांग सबसे ज्यादा है।
चीन से दोगुना महंगे हैं यहां बनने वाले देशी स्टोन
चीन के स्टोन की तुलना में भारत में बनने वाले देशी स्टोन दोगुना महंगे हैं। 1 से 10 एमएम के चीन के स्टोन की कीमत साढ़े तीन से दस रुपए तक है। सूरत के व्यापारी चीन का ही स्टोन इस्तेमाल करते हैं। सूरत के कपड़ा मार्केट में 1 फीसदी भी देशी स्टोन का इस्तेमाल नहीं होता है।