ईमान और इन्सानों से पटा पडा है यह महान भूभाग जीत हमेशा जीवन मूल्य सिद्वान्तों की ही सार्थक रही है स्वार्थवत
सियासत से कराहता सेवा कल्याण पुरूषार्थ स्वयं सिद्ध होता
प्रारब्ध को वर्तमान भविष्य मान इन्सान भले ही निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन के मार्ग में उसे बडी बाधा माने। मगर वह सिद्ध होता रहा है और सत्य भी यही है कि यह महान भूभाग कभी भी समृद्धि उच्च जीवन मूल्य सिद्धान्त, पुरूषार्थ से कभी बांझ नहीं रहा, न ही रहने वाला इतिहास गवाह है; कहावत तो यह है कि इस महान भूभाग पर असाधारण तो दूर साधारण से साधारण व्यक्ति के पुरूषार्थ, निष्ठा को ईमान, इन्सानियत ने सर का ताज ही नहीं है बल्कि उसे माना भी और सराहा भी और आज भी सराहा जा रहा है। बशर्ते इन्सान बैवस न हो, कहते है धैर्य, सन्तोष शान्ति वो अचूक अस्त्र होते है जो जीवन की सार्थकता सिद्ध करते है और जिन लोगों ने भी अपने नैसर्गिक स्वभाव, पुरूषार्थ के चलते अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन निष्ठापूर्ण किया है उन्हें सफलता भी मिली है और उन्हें सराहा भी गया है। जो लोग इंसानों की मजबूरी को हथियार बना अपनी सफलता पर गर्व महसूस करते है एक न एक दिन इंसानियत अवश्य उन्हें सच से सामना कराने से नहीं हिचकती। यहीं आज षडयंत्रपूर्ण स्वार्थवत सियासत करने वाले लोगों को समझने वाली बात होना चाहिए।