गो भक्त गवर्नर देवव्रत की पहल: राजभवन में गिर की गाय, स्टाफ के बच्चों को भी मिलेगा दूध
गांधीनगर / गांधीनगर में राजभवन के अंदर प्रवेश करते ही कान में छोटी-छोटी घंटियां और बछड़े के रंभाने की आवाज सुनाई देगी। यहां आने वाले लोगों को लगता है कि राजकीय प्रोटोकॉल के अनुसार सरकारी भवन में नहीं, बल्कि किसी गांव में पलने वाले पशुओं के स्थल पर पहुंच गए हैं। लेकिन, बात कुछ अलग है।
राजमहल में गोशाला
वैदिक परंपरा के अनुसार गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने राजभवन में गोशाला तैयार कर वहां गिर की गाय और उसके बछड़े पाल रखे हैं। राज्यपाल नियमित तौर पर गोशाले का जायजा लेते रहते है। उन्होंने गो पालन में रूचि और इसकी जानकारी होने के कारण गाय के पालन को सूचित कर उन्हें गाय और उसके बछड़े के बारे में मार्गदर्शन करते रहते है। इन गायों के बछड़ों द्वारा दूध पीने के बाद बचा हुआ दूध का उपयोग राजभवन में किया जाता है। भविष्य में गायों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
कर्मचारियों के बच्चों को दिया जाएगा दूध
राजभवन में उपयोग में आने वाला दूध निकाल लेने के बाद बचा दूध कर्मचारियों के बच्चों में बांट दिया जाएगा। कुछ दिनों पहले ही राज्यपाल ने इन गाय को गिर से मंगाया है और वे निरंतर गिर की गाय और देशी गाय की सुधारना के लिए प्रचार-प्रसार कर रहे है। इन गायों को हर दिन संपूर्ण ऑर्गेनिक पद्धति से उगाए गए घास खिलाया जाता है।
जब हिमाचल के गवर्नर थे...
आचार्य देवव्रत हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल थे तब ‘एक घर, एक गाय’ का नारा दिया था। उनका कहना है कि जहां हो वहां एक ड्रम रखकर उसमें गोमूत्र एकत्रित करना चाहिए। उसका उपयोग खाद बनाने के लिए करना चाहिए। इससे किसानों को भी अच्छी खाद उपलब्ध होगी। किसानों को जंतुनाशक और कीमती खाद से मुक्ति मिल सकेगी। जिससे बीमारियां भी कम होती है। मै एक किसान भी हूं और कुरूक्षेत्र में मेरा गुरुकुल है जहां 300 गाय हैं। जिनके मूत्र से खाद तैयार किया जाता है। हिमाचल के राजभवन में उनके पास सिंधी गाय थी। गाय के आराम के लिए उन्होंने गद्दी की भी व्यवस्था की थी। ठंड में उनके लिए गर्म कपड़े भी होते है। हिमाचल राजभवन ने उनके कार्यकाल में दूध, दही, माखन और लस्सी कभी बाजार से नहीं खरीदा। राजभवन में गाय की देखभाल के लिए एक विशेष व्यक्ति की नियुक्ति भी की गई थी।