इस शहर को भी है 7 बलात्कारियों की फांसी का इंतजार


इस शहर को भी है 7 बलात्कारियों की फांसी का इंतजार


इन मासूमों के साथ की थी दरिंदगी







इंदौर। निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में चार दोषियों को फांसी होने वाली है। उनका डेथ वारंट निकल गया है। इंदौर सेंट्रल जेल में भी फांसी सजा प्राप्त सात बलात्कारी बंद हैं। इंतजार है तो इनके डेथ वारंट जारी होने का। वारंट जारी होगा और उनके किए की सजा दी जाएगी। इन सभी की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है। इनमें से कुछ को तो छह साल से ज्यादा जेल में हो गए हैं। सेंट्रल जेल अधीक्षक राकेश भांगरे ने बताया कि जेल में फिलहाल फांसी के 11 कैदी बंद हैं। इनमें से हत्या के मामले के आरोपित भी हैं। सभी मामले फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। सभी के मामले में निर्णय आने तक कड़ी निगरानी के बीच रखा गया है। वैसे तो सभी को सामान्य कैदियों की तरह ही रखा जाता है, लेकिन इन पर निगरानी रखना जरूरी होता है, क्योंकि कई बार डिप्रेशन में ये लोग कुछ भी हरकत कर सकते हैं।

इंदौर-जबलपुर में फांसी घर सही सलामत हैं। इनमें से जबलपुर का चालू हालत में है। इंदौर सेंट्रल जेल में फांसीघर साफ-सफाई नहीं होने व प्लेटफॉर्म चालू हालत में नहीं है। वहीं इंदौर में एक बार में एक ही व्यक्ति को फांसी दी जा सकती है, वहीं जबलपुर में दो को फांसी दी जा सकती है।

2017 में याचिका खारिज:- 

जेल अधीक्षक राकेश भांगरे ने बताया कि वर्ष 2012 में एमआईजी थाना क्षेत्र में बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अप्रैल 2013 में जितेंद्र उर्फ जीतू पिता केदारसिंह, सन्नी उर्फ देवेंद्र पिता सुरेश और बाबू उर्फ केतन पिता रमेश को फांसी दी गई थी। इनके मामले में वर्ष 2017 में राष्ट्रपति ने दया याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद तीनों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगा दी गई। इस मामले में जितेंद्र के संबंध में एक आदेश आया था। इसमें 20 साल तक किसी भी तरह का लाभ नहीं देने की बात कही थी, लेकिन उसका सुपर सेशन वारंट आना बाकी है। इसके चलते उसे फांसी के कैदियों के साथ में ही रखा गया है। इनका मामला भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

मुंहबोली भानजी से बलात्कार व हत्या:-

चार साल की मुंहबोली भानजी के हत्यारे हनी उर्फ ककू पिता राजेश की भी फांसी की याचिका पर फैसला आना है। उसने ट्यूशन से लौट रही भानजी का अपहरण किया और उसके साथ बलात्कार कर हत्या कर दी थी थी। उसे सितंबर 2019 में फांसी की सजा का आदेश आया था। मामले में जेल से दया याचिका दायर की गई थी। जिस पर फैसला आना है। वहीं राजबाड़ा पर मां के पास सो रही बच्ची की हत्या करने वाले नवीन उर्फ अजय पिता दााजीराव को मई 2018 में सजा सुनाई गई थी। इसकी जेल के बाहर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है।

जिले से बाहर के तीन आरोपी:-

सेंट्रल जेल में फांसी की सजा वाले तीन कैदी जिले के बाहर के हैं। अनोखीलाल पिता सीताराम को खंडवा से 2013 में फांसी की सजा हुई थी। एक अन्य कैदी करण उर्फ फतिया पिता भारत मनार को हत्या और दुष्कर्म में मई 2018 में, वहीं विजय उर्फ पिंट्या पिता माणिकराव को बुरहानपुर में हत्या और दुष्कर्म के मामले में मार्च 2019 में सजा दी गई। इन तीनों की भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका विचाराधीन है।




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